Friday, May 25, 2012

मधुशाला में पाठशाला

घर से निकला था मैं जाने तो पाठशाला
पर रास्ते में ही मिल गई मुझे मधुशाला
मधुशाला में जा बैठा मैं भर अपना प्याला
तभी देखी शिव पर चढती एक माला
देख शिव की प्रतिमा मधुशाला में
खोजने चला मैं सत्य की राह में
पहुंचा फिर मैं मधुशाला
बहुत खोजा सत्य पर मुझे ना मिला
फिर बैठ मधुशाला में भर अपना प्याला
जो घूँट लगाया लेकर शिव की मंत्रमाला
अनुभव वो था अपने में ही निराला
मिल गए बहुत से शिक्षक बन गयी पाठशाला
जीन सत्य की खोज में चला था पाठशाला
दो घूंट मार मधुशाला ही बन गई पाठशाला
जो ज्ञान मिला संग बैठे हर दुखियारे से
जो चंद मिले संग बैठे कुछ कवियों से
जो अर्पित किया मैंने उनके गुणसागर को
सब धन्य हो चले अपने अपने घर को
बैठा था मधुहाला में अकेला
देख रहा था मदिरा का अब खेला
अनजान लोग जो मिले थे इस मधुशाला में
ज्ञान ऐसा दे गए तो ना मिलता किसी पाठशाला में

1 comment:

Rebellion said...

jaa baith madiraalay mein dhundh tu sach ki parchhain
main baithaa yahan shivalay mein, dikh rahi mujhe sach ki pratimurti