Thursday, May 17, 2012

प्रेम प्रसंग

प्यार तो मैंने किया तुमसे
पर मैं तुम्हारा प्यार ना पा सका
भरोसा तुमपर किया मैंने
पर तुम्हारा भरोसा ना पा सका

तू ना मेरी बन सकी कभी
ना मुझे कभी अपना बना सकी
ना था छल, कपट हमारे बीच
पर ना पनपा कभी विश्वास भी

आज तू चली फेर कर आँखें
छोड़कर मेरी ये दुनिया
अकेले ही अब चलना है मुझे
अकेले ही करना है जीवन यापन

प्रतीक्षा की हर समय मैंने तेरी
अब भी रहेगी तेरी ही प्रतीक्षा
पर मंशा यही है अब मेरी
कि मिले तुझे हर सुख

ना तुझे पा सके तो क्या
तेरे सुख में अपना सुख पा लेंगे
देख तुझे प्रसन्न हम
जीवन बसर कर लेंगे

1 comment:

Rebellion said...

jeevan basar karne ko aah nahin aas kaa saath chahiye
auron kee khusiyon se jyada aangan mein kilkaari chahiye