Saturday, May 19, 2012

तलाश-ऐ-जिंदगी


हम जिंदगी की तलाश में जिंदगी को खो बैठे
निकले थे प्यार की तलाश में, खुद को ही खो बैठे
अज़ाब-ऐ-इश्क से दूर
खुशियों को तलाशते थे
आज हम खुशियों से दूर हो गए
तलाश-ऐ-जिंदगी में जिंदगी से दूर हो गए

लबों पर लेकर तेरा नाम
ख्वाब में करके तेरा दीदार
ना हुआ ये एहसास हमें
कि दर्द दिल में दर्द का सैलाब है
तस्सव्वुर में तेरे अक्स के लिए
ना जाने इस जहाँ में कहाँ कहाँ भटके
तलाश-ऐ-जिंदगी में जिंदगी से दूर हो गए
आज हम खुशियों से दूर हो गए

ना थी कभी मंजिल सामने
ना था मंज़र कहीं हंसीं
पा कर भी हम ना पा सके
आरज़ू थी जिसकी जिगर में
तन्हां ता जिंदगी बीती हमारी
ना मिला कोई हमसफ़र
तलाश-ऐ-जिंदगी में जिंदगी से दूर हो गए
आज हम खुशियों से दूर हो गए

आगोश-ऐ-मौत में तलाश-ऐ-जिंदगी है
दामन में आज मेरे गम-ऐ-उल्फत है
हम जिंदगी की तलाश में जिंदगी को खो बैठे
निकले थे प्यार की तलाश में, खुद को ही खो बैठे
इश्क हमें जिंदगी से हुआ इस कदर बेइन्तिहाँ
कि तलाश-ऐ-जिंदगी में जिंदगी से दूर हो गए
खुशियों के बीच रहकर भी
हम खुशियों से दूर हो गए




1 comment:

Rebellion said...

yaar khushiyon ko dhundhane kya nikale, jara apne aangan mein jhaank lete kuchh aur nahin to chidiya ko do daane dhugga hi daal dete