Monday, June 4, 2012

एक कसक

जिंदगी तमाम गुज़र गई
तेरे प्यार में हर रात गुज़र गई
अब बैठे हैं उम्र के उस कगार पर
जहाँ तेरी याद की कसार रह गई

ना तू हा ना तेरा साथ है
दूर दूर तक बस तन्हाई का साया है
ना जाने ज़िंदगी की राह में
किस मुकाम पर तू चली गई

राह तकते रह गए हम यूँही
कि जिंदगी तमाम गुज़र गई
तेरी राह तकते हुए जाने जाँ
जिंदगी की हर रात गुज़र गई

सोचते हैं अब हम बैठे यूँ तन्हाँ
कि हमारी क्या खता गवार कर गयी
कि तेरा प्यार तो नसीब ना हुआ
तेरी रूह भी साथ छोड़ गई

1 comment:

Rebellion said...

tujhe chhod chale they hum raah apni
yaadon ne kasti ko kinaara naa diya
chhod chalee jis pal tu humein
kisi ne humare janaaze ko kaandha na diya